विश्व आर्थिक मंच का ध्येय वाक्य है, ‘विश्व की हालत में सुधार करने को समर्पित।’ खुशनुमा दौर में यह आशावाद...
Category: राष्ट्र हित
हालात बिगडऩे से पहले संभल जाएं तो बेहतर
अगर आपकी पीठ पर कोई मस्सा हो जाता है तो आप उसे कमीज के नीचे छिपा लेते हैं और इंतजार...
बहुत ज्यादा सख्ती से बिगड़ भी सकता है खेल
बीते गुरुवार की देर शाम जब मैं अनिच्छापूर्वक हवाई अड्डे के लिए निकला तो सोच रहा था कि बेंगलूरु की...
एक क्षमतावीर बदल सकता है तस्वीर
साहित्यिक चोरी की खोजबीन में लगे रहने वाले लोग अगर इस सप्ताह का राष्ट्र की बात स्तंभ पढ़ेंगे तो उनकी...
इंदिरा की राह पर मोदी सरकार
नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार का राज्य की शक्ति, राजनीतिक और आर्थिक अर्थव्यवस्था के प्रति क्या नजरिया है,...
भूल जाओ काला धन कैशलेस का जमाना
नरेंद्र मोदी सरकार के भीतर जारी असमंजस हमें स्वतंत्र भारत के एक और कालखंड से जुड़ी एक कहानी की याद...
अब ‘विमोदीकरण’ के लिए लग रही होड़
विमुद्रीकरण या नोटबंदी 2019 के लिए मोदी का ‘आर या पार’ वाला दांव है। विपक्षी नेताओं को इसमें मौका दिख...
समाजवाद की ‘मैमरी’ में उलझी नौकरशाही
इस सप्ताह के ‘राष्ट्र की बात’ स्तंभ के शीर्षक को देखकर आप इसे कोई शरारत न समझें। मैं इस तरह...
राज-काज का कुछ अलग अंदाज
एक आम मनुष्य का मस्तिष्क दो हिस्सों में बंटा होता है। इनमें से प्रत्येक का काम अलग होता है। अगर...
मतदाताओं की पसंदीदा है बदलाव की प्रक्रिया
अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डॉनल्ड ट्रंप की जीत को दुनिया भर में व्याप्त प्रवृत्ति की ही पुष्टिï माना जा रहा...